- हाईलाइट
- नॉर्वे में महिला पत्रकार के सवाल के बाद पीएम मोदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस चर्चा में।
- विदेश मंत्रालय को देना पड़ा जवाब, भारत के लोकतंत्र पर उठे सवाल।
- जर्मनी, नीदरलैंड और अमेरिका में भी पहले उठ चुका है यह मुद्दा।
- पीएम मोदी ने खुद बताया था कि वे प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं करते।
- क्या बदल रही है भारत की राजनीतिक संवाद शैली? पूरा विवाद समझिए।
PM Modi: Patna: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर अपने विदेश दौरे के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवाल न लेने को लेकर चर्चा में हैं। इस बार यह मुद्दा नॉर्वे में उस समय गरमा गया जब एक महिला पत्रकार ने सार्वजनिक तौर पर प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछने का आग्रह किया, लेकिन उन्हें जवाब नहीं मिला।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूरोप दौरे पर हैं। नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनस गार स्टोरे के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान स्थानीय पत्रकार हेला लेंग ने पीएम मोदी से पूछा कि वह दुनिया की स्वतंत्र प्रेस के सवालों का जवाब क्यों नहीं लेते। हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया।
विदेश मंत्रालय को देनी पड़ी सफाई
इस घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय को सफाई देनी पड़ी। विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां लोकतांत्रिक मूल्यों का पूरा सम्मान किया जाता है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत एक “सभ्यतागत राष्ट्र” है और लोकतंत्र उसकी मूल भावना में शामिल है।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
यह पहली बार नहीं है जब पीएम मोदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर सवाल उठे हैं।
2022 में जर्मनी दौरे के दौरान भी पत्रकारों ने सवाल न लेने पर आपत्ति जताई थी।
नीदरलैंड्स यात्रा में भी यही मुद्दा सामने आया।
हालांकि 2023 में अमेरिका दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दो सवालों के जवाब दिए थे, जिसे पश्चिमी मीडिया ने “दुर्लभ घटना” बताया था।
विपक्ष ने साधा निशाना
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि सवालों से डरना लोकतंत्र के लिए सही संकेत नहीं है।
वहीं कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस से दूरी बनाए रखना पीएम मोदी की एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।
PM मोदी ने खुद क्या कहा था?
मई 2024 में एक इंटरव्यू के दौरान जब प्रधानमंत्री मोदी से पूछा गया कि वह प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं करते, तो उन्होंने कहा था:
“मैं मीडिया के जरिए राजनीति नहीं करना चाहता, मैं सीधे जनता से संवाद करना पसंद करता हूं। आज के दौर में मीडिया ही संवाद का एकमात्र माध्यम नहीं है।”
क्या है पूरा विवाद?
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक राजनीति में नेताओं का जनता से सीधे संवाद बढ़ा है, लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस लोकतंत्र का अहम हिस्सा मानी जाती है क्योंकि इससे जवाबदेही तय होती है।
यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रेस कॉन्फ्रेंस न करने का मुद्दा बार-बार बहस का विषय बन जाता है।
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