Nitish सरकार के गले की फांस बनी नई शिक्षक नियमावली, महागठबंधन के अंदर ही उठा पटक शुरू

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पटना Patna: बिहार (Bihar) में शिक्षक (Teacher) बहाली नई नियमावली (Restoration New Manual) नीतीश सरकार (Nitish government) का सिर दर्द बन गई है। 2005 से अब तक पंचायतों (Panchayats) और निकायों द्वारा संविदा पर बहाल 3 लाख 50 हजार (3 lakh 50 thousand) शिक्षक सरकारी (teacher government) ओहदे के इंतजार में थे। लगभग बिहार (Bihar) में इतने ही शिक्षकों (teachers) की और नियुक्ति की जानी थी। सबको उम्मीद था कि सरकार नई नियमावली लाएगी (Government will bring new rules) तो उनकी कई उम्मीदें पूरी होंगी। सरकार ने इसी महीने नई नियमावली की घोषणा कर दी, शिक्षक बनने की आस पाले अभ्यर्थियों की उम्मीदों पर सरकार ने पानी फिर गया है। संविदा शिक्षक तो सरकारी शिक्षक (Teacher) नहीं ही बन पाए, टीईटी (TET) या सीटीईटी (CTET) पास अभ्यर्थियों (candidates) के लिए भी सरकार ने बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है। बिहार लोक सेवा आयोग (Bihar Public Service Commission) शिक्षकों (teachers) की नियुक्ति का विज्ञापन निकाल कर परीक्षा लेगा। आयोग से उत्तीर्ण अभ्यर्थी ही सरकारी शिक्षक बन पाएंगे। इसके लिए सिर्फ 3 चांस उन्हें मिलेगा। 3 बार में भी अगर उन्होंने परीक्षा पास नहीं की तो शिक्षक प्रशिक्षण और टीईटी (TET) या सीटीईटी (CTET) की परीक्षा (Exam) में उनकी कामयाबी किसी काम की नहीं रह जाएगी। यही वजह है कि शिक्षक नियुक्ति नई नियमावली (teacher appointment new rules) का हर जगह विरोध हो रहा है।

मजदूर दिवस (Labour Day) के मौके पर पूरे बिहार के शिक्षकों (Bihar teachers) ने नई शिक्षक नियुक्ति नियमावली (New Teacher Recruitment Rules) का विरोध (Oppose) किया। यह संविदा शिक्षकों (contract teachers) का सांकेतिक विरोध था। आंदोलन (Agitation) के अगले कदम की रूपरेखा शिक्षक संघ (teachers union) तय करेगा। महागठबंधन सरकार (grand alliance government) में शामिल वाम दलों (left parties) के नेताओं ने भी नियुक्ति नियमावली पर घोर आपत्ति जताई है। वाम नेताओं का प्रतिनिधिमंडल सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) और डेप्युटी सीएम तेजस्वी यादव (Deputy CM Tejashwi Yadav) से मिल कर अपनी आपत्ति दर्ज कराएगा।

महागठबंधन सरकार (grand alliance government) में शामिल सीपीआई (cpi), सीपीएम (cpm) और भाकपा (माले) (CPI (ML)) जैसे वाम दलों की बैठक के बाद नेताओं ने साझा बयान जारी कर नई शिक्षक नियमावली पर कड़ी आपत्ति जताई। वाम दलों का साफ कहना है कि बिहार शिक्षक नियुक्ति नियमावली- 2023 में वर्षों से कार्यरत नियोजित शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा देने का फैसला तो अच्छा है, लेकिन इस नियमावली में राज्यकर्मी का दर्जा देने की शर्त टेढ़ी है। इसके लिए बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा पास करने की शर्त जोड़ी गई है। इससे बिहार के लाखों नियोजित शिक्षक डरे हुए हैं।

वाम दलों (left parties) का साफ कहना है कि नियोजित शिक्षकों (employed teachers) ने सरकार के सभी कार्यों का सही ढंग से चलायाहै। बिहार की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में इनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता। वाम दलों की मांग है कि सभी नियोजित शिक्षकों को बिना किसी परीक्षा के सीधे राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाए। यह महागठबंधन के 2020 के घोषणा पत्र के अनुरूप होगा। नई शिक्षक नियमावली पर शिक्षक संगठनों और अभ्यर्थियों की आपत्तियों पर सीएम नीतीश कुमार और डेप्युटी सीएम तेजस्वी यादव को संज्ञान लेना चाहिए। नियोजित शिक्षकों ने 17 साल इंतजार किया है।

आप को बता दे की नीतीश सरकार 3 लाख शिक्षकों (Nitish government 3 lakh teachers) की नियुक्ति की तैयारी में लग गई है। इसके लिए शिक्षक अभ्यर्थी को सबसे पहले शिक्षक प्रशिक्षण की परीक्षा पास करनी होगी। उसके बाद टीईटी (TET) या सीटीईटी (CTET) की परीक्षा उत्तीर्ण करना जरूरी होगा। फिर बिहार लोक सेवा आयोग (Bihar Public Service Commission) की परीक्षा पास करनी होगी। इसके लिए भी अभ्यर्थी को 3 मौके ही मिलेंगे। इतना सब करने के बाद अभ्यर्थी सरकारी शिक्षक (government teacher) का दर्जा प्राप्त कर लेगा, लेकिन उसका वेतनमान 40 हजार से 50 हजार (40 thousand to 50 thousand) के बीच ही होगा।

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा (Leader of Opposition in Bihar Legislative Assembly Vijay Kumar Sinha) का कहना है कि सरकार शिक्षक अभ्यर्थियों और नियोजित शिक्षकों के साथ खिलवाड़ बंद करे। उन्होंने नियोजित शिक्षकों के द्वारा नयी शिक्षा नियमावली के विरोध में प्रदर्शन को अपना नैतिक समर्थन दिया है। उन्होंने कहा है कि सरकार को नियोजित शिक्षकों और पात्रता परीक्षा पास अभ्यर्थियों की सीधी नियुक्ति करनी चाहिए। राज्य सरकार इनकी नियुक्ति के बाद बाकी बचे पदों पर नियुक्ति के लिए बिहार लोक सेवा आयोग को भेजे। शिक्षक के लाखों पदों पर रिक्तियों को लेकर उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Deputy Chief Minister Tejashwi Yadav) ने 2020 के चुनाव में सीधी नियुक्ति का वादा भी किया था। RJD के मंत्री के पास शिक्षा विभाग है तो ये अपने वादे से मुकर गए हैं।

बिहार में नई शिक्षक नियुक्ति नियमावली बिहार लोक सेवा आयोग (Bihar Public Service Commission) (BPSC) को भार दिया जा रहा है। बिहार के लोग अच्छी तरह जानते हैं कि अभी तक आयोग की निष्पक्षता संदिग्ध रही है। पूर्व में इसके चेयरमैन जेल भी जा चुके हैं। 67वीं पीटी परीक्षा का भी पिछले साल प्रश्नपत्र लीक हुआ था। बीपीएससी वैसे भी हाल के दिनों में विवादों में रहा है। जानकारों को मानना है कि शैक्षणिक स्तर की बड़े स्तर पर होने वाली बहाली की तैयारी पूरी नहीं है। इसलिए इसमें भी जमकर धांधली होगी। इसमें सेटिंग करने वाले लोग पास हो जाएंगे। इतना ही नहीं कई लोग शिक्षकों से परीक्षा पास कराने के नाम पर वसूली शुरू कर देंगे। इससे पहले ही कई तरह की समस्या से शिक्षक जूझ रहे हैं। आपको बता दें कि बीपीएससी की विश्वसनीयता पर पहले से संकट है। बीपीएससी अपनी परीक्षा सही तरीके से नहीं ले पाता है।

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