- Highlight
- बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है।
- एनडीए प्रत्याशी अभिषेक कुमार ‘बंटी’ ने अपना नामांकन वापस ले लिया।
- उन्होंने बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को पत्र सौंपकर पारिवारिक कारणों का हवाला दिया।
- पत्र में चुनाव नहीं लड़ पाने की असमर्थता जताते हुए संगठन के प्रति आभार व्यक्त किया गया है।
- अब सभी की नजर बीजेपी के अगले कदम और नए उम्मीदवार पर टिक गई है।
Bankipur By Election: पटना: बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में शुक्रवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार अभिषेक कुमार उर्फ अभिषेक बंटी ने अपना नामांकन वापस लेने का फैसला किया। उन्होंने बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को संबोधित एक पत्र सौंपकर चुनाव नहीं लड़ पाने की जानकारी दी। यह घटनाक्रम नामांकन दाखिल करने के तुरंत बाद सामने आया, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पत्र में अभिषेक बंटी ने लिखा कि उन्हें बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में एनडीए प्रत्याशी बनाए जाने के लिए केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व का आभार है। उन्होंने कहा कि वे पारिवारिक कारणों से चुनाव लड़ने में असमर्थ हैं, इसलिए विनम्रतापूर्वक अपना नाम वापस ले रहे हैं।
पत्र में क्या लिखा है?

अभिषेक बंटी ने अपने पत्र में कहा कि—
“मुझे भारतीय जनता पार्टी ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में एनडीए प्रत्याशी बनाया, उसके लिए केंद्रीय एवं प्रदेश नेतृत्व के प्रति मैं आभार व्यक्त करता हूं। विनम्रतापूर्वक निवेदन है कि पारिवारिक कारणों से मैं यह चुनाव लड़ने में असमर्थ हूं। मैं पार्टी का समर्पित कार्यकर्ता बनकर आगे भी पूरी निष्ठा के साथ सेवा करता रहूंगा।”
पत्र पर उनके हस्ताक्षर और तारीख भी दर्ज है, जिसे उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को सौंपा।

नामांकन के तुरंत बाद बदला फैसला
गौरतलब है कि भाजपा ने हाल ही में अभिषेक बंटी को बांकीपुर उपचुनाव के लिए एनडीए का उम्मीदवार घोषित किया था। उन्होंने पार्टी नेताओं और समर्थकों की मौजूदगी में नामांकन भी दाखिल किया था। लेकिन नामांकन के अगले ही दिन चुनावी मैदान से हटने का फैसला सभी के लिए अप्रत्याशित माना जा रहा है।
अब आगे क्या?
अभिषेक बंटी के नामांकन वापस लेने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि भाजपा इस सीट पर नया उम्मीदवार उतारेगी या आगे की रणनीति क्या होगी। बांकीपुर सीट राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है और इस अचानक हुए बदलाव ने चुनावी समीकरणों को नई दिशा दे दी है।

