Solar Panel: घर में सोलर लगवाने से पहले जान लें नेट मीटरिंग का पूरा नियम, नहीं तो बिजली बिल में हो सकता है बड़ा नुकसान!

Solar Panel: घर में सोलर प्लांट लगाने से पहले नेट मीटरिंग की पूरी जानकारी जानें। कैसे होता है बिजली का हिसाब, क्या हैं फायदे और किन समस्याओं से रहें सावधान।

youthjagran
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नेट मीटरिंग की सही जानकारी से सोलर प्लांट का पूरा लाभ लिया जा सकता है।

Highlight
घर में सोलर प्लांट लगवाने से पहले नेट मीटरिंग समझना बेहद जरूरी है।
गलत मीटरिंग की वजह से बिजली बिल में नुकसान हो सकता है।
जानिए सोलर बिजली का हिसाब कैसे रखा जाता है।
अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजने का पूरा नियम समझिए।
सोलर लगाने वालों के लिए यह जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है।

Solar Panel: देशभर में बढ़ती बिजली की मांग और महंगे बिजली बिलों के बीच अब बड़ी संख्या में लोग अपने घरों की छतों पर रूफटॉप सोलर प्लांट लगवा रहे हैं। सरकार भी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लोगों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इससे न केवल बिजली का खर्च कम होता है, बल्कि अतिरिक्त बिजली बेचकर आर्थिक लाभ भी प्राप्त किया जा सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि सोलर प्लांट लगाने से पहले नेट मीटरिंग की जानकारी होना बेहद जरूरी है। यदि इसकी सही समझ नहीं होगी तो उपभोक्ताओं को बिजली बिल और यूनिट के हिसाब में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

क्या होती है नेट मीटरिंग?
नेट मीटरिंग एक ऐसी तकनीकी और बिलिंग व्यवस्था है, जिसके माध्यम से यह रिकॉर्ड किया जाता है कि आपके सोलर प्लांट ने कितनी बिजली बनाई, आपने कितनी बिजली इस्तेमाल की और कितनी अतिरिक्त बिजली बिजली विभाग के ग्रिड में भेजी गई।

मान लीजिए आपके सोलर प्लांट ने एक दिन में 12 यूनिट बिजली तैयार की और आपने 10 यूनिट बिजली खर्च की। ऐसे में बची हुई 2 यूनिट बिजली ग्रिड में चली जाएगी। बाद में यही अतिरिक्त यूनिट आपके बिजली बिल में समायोजित (Adjust) कर दी जाती है।

नेट मीटरिंग क्यों है जरूरी?
यदि नेट मीटरिंग सही तरीके से काम करे तो उपभोक्ता को बिजली बिल में सीधा लाभ मिलता है। अतिरिक्त बिजली का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है और भविष्य के बिल में उसका समायोजन किया जाता है।

लेकिन यदि मीटर सही रीडिंग दर्ज नहीं करे या रिकॉर्डिंग में तकनीकी समस्या हो जाए, तो उपभोक्ता को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता।

कई उपभोक्ताओं ने जताई चिंता
कुछ राज्यों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि ग्रिड में भेजी गई अतिरिक्त बिजली का पूरा रिकॉर्ड नहीं दिख रहा है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि जितनी यूनिट उन्होंने भेजी, उससे कम यूनिट का हिसाब दर्ज किया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी स्थिति कई बार नेट मीटरिंग सिस्टम और बिजली विभाग के राजस्व प्रबंधन सिस्टम (Revenue Management System) के बीच तकनीकी समन्वय की कमी के कारण भी उत्पन्न हो सकती है। हालांकि, इस तरह की शिकायतों का समाधान संबंधित बिजली वितरण कंपनी और अधिकृत सोलर इंस्टॉलर के माध्यम से कराया जा सकता है।

सोलर लगवाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
केवल अधिकृत कंपनी से ही सोलर प्लांट लगवाएं।
नेट मीटर लगाने की प्रक्रिया पूरी तरह समझें।
इंस्टॉलेशन के बाद मीटर की जांच अवश्य करें।
बिजली बिल और नेट मीटर की रीडिंग का समय-समय पर मिलान करें।
किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में तुरंत बिजली विभाग से संपर्क करें।

निष्कर्ष
रूफटॉप सोलर सिस्टम बिजली बचाने का एक बेहतरीन विकल्प है, लेकिन इसका पूरा लाभ तभी मिलेगा जब नेट मीटरिंग सिस्टम सही तरीके से काम करे। इसलिए सोलर प्लांट लगवाने से पहले इसकी प्रक्रिया, मीटरिंग और बिलिंग सिस्टम की पूरी जानकारी जरूर लें। इससे भविष्य में किसी भी प्रकार की आर्थिक या तकनीकी परेशानी से बचा जा सकता है।

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