Patna NEET Student Rape Death: पीड़ित की मां ने कहा-उसे फांसी दो, प्रशांत किशोर पीड़ित परिवार से मिले

youthjagran
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Patna NEET Student Rape Death

Patna NEET Student Rape Death: पटना में NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा के रेप (Rape) और संदिग्ध मौत के मामले ने अब ऐसा मोड़ ले लिया है कि पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट (post mortem report) से साफ हो गया है कि यह अचानक तबीयत खराब होने या आत्महत्या (suicide) का मामला नहीं है, बल्कि लंबे समय तक की गई क्रूरता और यौन हिंसा का नतीजा है। रिपोर्ट के मुताबिक, छात्रा करीब डेढ़ से दो घंटे तक अपने साथ हुई क्रूरता का विरोध करती रही।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने संघर्ष की पूरी कहानी बताई (The post-mortem report revealed the complete story of the struggle.)
पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) में गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, छात्रा के शरीर पर कई गंभीर और ताज़ा चोटें पाई गई हैं। डॉक्टरों ने साफ लिखा है कि ये सभी चोटें मौत से पहले लगी थीं।

इसका मतलब है कि छात्रा ने अपनी आखिरी सांस तक खुद को बचाने की कोशिश की। ये चोटें उसकी चीखों, उसके संघर्ष और उसके दर्द की खामोश गवाही दे रही हैं।

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गर्दन और कंधों पर गहरे नाखूनों के निशान (Deep nail marks on the neck and shoulders.)
रिपोर्ट में गर्दन और कंधों के आसपास क्रिसेंटिक नेल एब्रेशन यानी नाखूनों से बने गहरे घाव दर्ज किए गए हैं।

डॉक्टरों के मुताबिक, ऐसे निशान तभी बनते हैं जब पीड़ित हमलावर से खुद को छुड़ाने की कोशिश करता है और आरोपी उसे जबरदस्ती पकड़ता या दबाता है। यह साफ संकेत है कि छात्रा ने हार नहीं मानी, बल्कि विरोध करती रही।

छाती पर खरोंच के निशान (Scratch marks on the chest)
पोस्टमार्टम में छात्रा की छाती और कंधों के नीचे कई खरोंच के निशान मिले हैं। ये खरोंच एक जगह तक सीमित नहीं हैं, बल्कि फैले हुए हैं।

मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसी स्थिति तब होती है जब पीड़ित को लंबे समय तक जमीन या किसी सख्त सतह पर दबाया जाता है या नाखूनों से खरोंचा जाता है। पीठ पर नीले निशान, संघर्ष कुछ मिनटों का नहीं था
रिपोर्ट में पीठ पर कई चोटों यानी नीले निशानों का भी ज़िक्र है। इससे साफ होता है कि छात्रा की पीठ को बार-बार किसी सख्त सतह पर रगड़ा गया था।

डॉक्टरों की राय में, यह संघर्ष कुछ मिनटों का नहीं बल्कि काफी देर तक चला। इसी आधार पर यह भी आशंका जताई जा रही है कि इस घटना में एक से ज़्यादा लोग शामिल हो सकते हैं।

प्राइवेट पार्ट पर गंभीर चोट, जबरदस्ती रेप की पुष्टि। (Serious injuries to the private parts, confirming forced rape.)
पोस्टमॉर्टम का सबसे ज़रूरी हिस्सा जेनिटल एग्जामिनेशन है। रिपोर्ट में साफ लिखा है कि छात्रा के प्राइवेट पार्ट्स पर ताज़ा और गंभीर चोटें मिली हैं।

वेजाइनल एरिया में गहरे रगड़ने के निशान हैं और काफी खून बहा है। मेडिकल बोर्ड की साफ राय है कि ये चोटें आपसी सहमति से बने संबंधों का नतीजा नहीं हैं, बल्कि ज़बरदस्ती पेनिट्रेशन का नतीजा हैं।

मेडिकल राय: यह यौन हिंसा का मामला है (Medical opinion: This is a case of sexual violence.)
डॉक्टरों ने अपनी राय में साफ लिखा है कि शरीर के दूसरे हिस्सों पर संघर्ष के निशान साबित करते हैं कि छात्रा बेहोश नहीं थी।

वह पूरी तरह होश में थी और खुद को बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी। रिपोर्ट के आखिर में यह साफ किया गया है कि मिले सभी तथ्य यौन हिंसा से मेल खाते हैं। मौत के असली कारण के बारे में, विसरा को सुरक्षित रखा गया है, जिसे आगे की जांच के लिए AIIMS भेजा गया है।

पुलिस की थ्योरी बनाम पोस्टमार्टम के तथ्य (Police theory versus post-mortem facts)
इस मामले में, पुलिस की शुरुआती थ्योरी और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के तथ्य आमने-सामने खड़े हैं। पुलिस ने पहले कहा था कि छात्रा डिप्रेशन में थी और मोबाइल सर्च हिस्ट्री और जो नींद की गोलियां वह ले रही थी, उसके आधार पर आत्महत्या का शक जताया था।

लेकिन पोस्टमॉर्टम के तथ्यों से पता चलता है कि शरीर पर संघर्ष के दर्जनों निशान हैं, जो यौन हिंसा की ओर इशारा करते हैं।

‘यौन शोषण का कोई सबूत नहीं’ – यह दावा भी गलत साबित हुआ (The claim that there was ‘no evidence of sexual abuse’ also proved to be false.)
पुलिस ने कहा था कि शुरुआती जांच में यौन शोषण का कोई सबूत नहीं मिला। जबकि पोस्टमॉर्टम में प्राइवेट पार्ट्स पर ताज़ा चोटें, टिश्यू ट्रॉमा और खून बहना पाया गया। मेडिकल राय में साफ लिखा है कि यौन शोषण की पुष्टि हुई है।

बेहोशी की थ्योरी पर भी सवाल (The theory of unconsciousness is also being questioned.)
पुलिस ने कहा था कि छात्रा बेहोश मिली थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट कहती है कि सभी चोटें मौत से पहले की थीं। यह साबित करता है कि छात्रा बेहोश नहीं थी बल्कि काफी देर तक हमले का विरोध कर रही थी।

परिवार का आरोप: पुलिस किसे बचाना चाहती है? (The family alleges: Who is the police trying to protect?)
पीड़ित परिवार ने पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि FIR के बाद हॉस्टल ऑपरेटर ने पैसे देकर ‘समझौता’ करने की कोशिश की। सवाल यह उठता है कि अगर मामला साफ था, तो समझौते की ज़रूरत क्यों पड़ी?

तीन संदिग्धों को रिहा करने का दावा (They claim to have released three suspects.)
परिवार वालों का कहना है कि पूछताछ के बाद तीन संदिग्धों को रिहा कर दिया गया। परिवार पूछ रहा है कि क्या यह रिहाई सबूतों की कमी के कारण हुई या किसी दबाव में। अगर शुरुआती मेडिकल संकेत इतने गंभीर थे, तो इतनी जल्दबाजी में क्लीन चिट क्यों दी गई?

अंदरूनी लोगों के शामिल होने का शक, जान-पहचान वालों पर भी शक (There is suspicion of insider involvement, and acquaintances are also under suspicion.)
परिवार को डर है कि पीड़ित के किसी जान-पहचान वाले का भी इस घटना में हाथ हो सकता है। सवाल यह है कि क्या पुलिस ने कॉल डिटेल्स, हॉस्टल एंट्री-एग्जिट और जान-पहचान वालों के कनेक्शन की गहराई से जांच की?

SSP ने कहा – पोस्टमॉर्टम के हिसाब से जांच (The SSP said that the investigation will be conducted based on the post-mortem report.)
पटना SSP कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर जांच की जा रही है। FSL रिपोर्ट का इंतजार है और मृतक का मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है ताकि डिलीट किया गया डेटा भी रिकवर किया जा सके।

DGP ने उच्च स्तरीय SIT का गठन किया (The DGP has constituted a high-level SIT.)
मामले की गंभीरता को देखते हुए DGP विनय कुमार ने एक उच्च स्तरीय SIT का गठन किया है। जोनल IG पटना जितेंद्र राणा को जांच की जिम्मेदारी दी गई है। SIT में सात अधिकारी शामिल हैं, जबकि एक महिला थाना अधिकारी को जांच से दूर रखा गया है।

प्रशांत किशोर पीड़ित परिवार से मिले (Prashant Kishor met with the victim’s family.)
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर जहानाबाद पहुंचे और पीड़ित के रिश्तेदारों से मिले। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी घटना है जो सिर्फ एक परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की आत्मा को झकझोर देती है। अगर शुरुआती जांच में कोई गलती हुई है, तो उसे तुरंत सुधारा जाना चाहिए।

मां की चीख: मुझे न्याय चाहिए, उसे फांसी दो (The mother’s cry: I want justice, hang him!)
पीड़ित की मां का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। रोते हुए उन्होंने कहा, “मेरी बेटी पढ़ने गई थी। 6 तारीख को मुझे फोन आया कि वह बेहोश है। जब वह मिली, तो उसने कहा, मेरे साथ गलत हुआ है। तीनों मिले हुए हैं।” मां ने मीडिया से कहा, ‘मुझे न्याय चाहिए, जिसने मेरी बेटी की जान ली, उसे फांसी दो।’

यह सिर्फ एक मामला नहीं, हर बेटी का सवाल (This is not just one isolated case, it’s a question that concerns every daughter.)
यह मामला अब सिर्फ एक छात्रा की मौत नहीं, बल्कि देश में बेटियों की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था के लिए एक लिटमस टेस्ट बन गया है। मां की आवाज पूरे समाज से सवाल कर रही है, क्या क्रूरता के खिलाफ न्याय होगा या सच को दबा दिया जाएगा?

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