- Highlight
- NEET-UG विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पद से इस्तीफा दे दिया है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए पत्र में उन्होंने छात्रों के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
- उन्होंने परीक्षा सुधार, CBI जांच और CBT मोड लागू करने जैसे फैसलों का भी उल्लेख किया।
- पिछले 10 दिनों की घटनाओं से आहत होने की बात कहते हुए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला लिया।
- देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच यह फैसला राजनीतिक और शैक्षणिक दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
Dharmendra Pradhan Resignation: नई दिल्ली। देशभर में NEET-UG परीक्षा को लेकर जारी विवाद और छात्रों के आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेज दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए पत्र में कहा कि छात्रों का भविष्य किसी भी विवाद या राजनीतिक टकराव से ऊपर है और इसी भावना के साथ उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया।
अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि पिछले चार दशकों से अधिक समय से उनका जीवन शिक्षा, छात्रों और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा है। उनका मानना है कि एक मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही किसी भी देश के विकास की सबसे मजबूत नींव होती है।
— Dharmendra Pradhan (@dpradhanbjp) July 25, 2026
उन्होंने बताया कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई की। मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी (CBI) को सौंपी गई, परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया और भविष्य में परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में आयोजित करने की घोषणा की गई।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में कहा कि 20 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, अभिभावकों और छात्रों के सहयोग से 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित कराई गई। इसके बाद 16 जुलाई 2026 को परिणाम घोषित किए गए, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के कई विद्यार्थियों ने सफलता हासिल की।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों द्वारा छात्रों को भ्रमित करने की कोशिश की गई, जिससे उन्हें व्यक्तिगत रूप से काफी पीड़ा हुई। उन्होंने लिखा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं ने उन्हें गहराई से विचलित किया है।
इस्तीफे में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय उनके व्यक्तिगत सम्मान से जुड़ा नहीं है, बल्कि देश के युवाओं के हित में लिया गया कदम है। उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि छात्रों का भविष्य कानूनी विवादों, राजनीतिक मतभेदों या लंबे संघर्षों में उलझ जाए और उनकी पढ़ाई प्रभावित हो।

पत्र के अंत में धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों तथा कर्मचारियों का धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास जताया कि सार्वजनिक जीवन में आगे भी वे देश, ओडिशा की जनता और युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए कार्य करते रहेंगे।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को देश की शिक्षा व्यवस्था और मौजूदा परीक्षा सुधारों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार की ओर से नए शिक्षा मंत्री और परीक्षा सुधारों को लेकर आगे की रणनीति पर सभी की नजर रहेगी।
(नोट: यह समाचार उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और संबंधित पक्ष द्वारा साझा किए गए पत्र के आधार पर तैयार किया गया है।)
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