- Highlight
- PhD भर्ती नियमावली 2026 के खिलाफ बिहार में रिसर्च स्कॉलर्स का विरोध तेज हो गया है।
- प्रदर्शनकारियों ने जुलूस निकालकर उच्च शिक्षा मंत्री और अधिकारियों के पुतले फूंके।
- PhD वेटेज, उम्र सीमा और रिसर्च पब्लिकेशन को लेकर आंदोलनकारियों ने सवाल उठाए हैं।
- PAT और BET परीक्षा शुरू कराने समेत कई मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी है।
- कुमुद पटेल समेत तीन आंदोलनकारी आठवें दिन भी आमरण अनशन पर डटे हैं।
Ph.D Holder Protest Bihar: पटना/बिहार: बिहार में उच्च शिक्षा और विश्वविद्यालय सेवा से जुड़ी नई नियमावली को लेकर PhD धारकों और रिसर्च स्कॉलर्स का विरोध लगातार जारी है। ऑल पी-एच.डी. होल्डर एंड रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन के बैनर तले चल रहे आमरण अनशन और धरना के समर्थन में प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को धरना स्थल से विशाल जुलूस निकाला।
प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग के अध्यक्ष गिरीश चौधरी, उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर और राजभवन के सचिव दीपक कुमार के पुतले का दहन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह विरोध बिहार में लागू की गई नियमावली 2026 के प्रावधानों के खिलाफ है।
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नियमावली में बदलाव को लेकर प्रदर्शनकारियों की आपत्ति
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने नई नियमावली में रिसर्च पब्लिकेशन को पर्याप्त स्थान नहीं दिए जाने, अनुभव को महत्व नहीं मिलने और शैक्षणिक अंकों के मूल्यांकन से जुड़े प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं।
आंदोलनकारियों का दावा है कि नई व्यवस्था में मैट्रिक और इंटर के अंकों को भी चयन प्रक्रिया में शामिल किया गया है। इसके अलावा PhD के लिए मिलने वाले वेटेज को 30 अंक से घटाकर 11 अंक किए जाने और उम्र सीमा को 55 वर्ष से घटाकर 43 वर्ष किए जाने को लेकर भी विरोध जताया गया है।
प्रदर्शनकारियों ने इन बदलावों को उच्च डिग्रीधारी अभ्यर्थियों के हितों के विपरीत बताया है और नियमावली की समीक्षा की मांग की है।
UGC गाइडलाइन का मुद्दा भी उठा
प्रदर्शन के दौरान UGC की गाइडलाइन और बिहार की नियमावली के बीच कथित अंतर को लेकर भी सवाल उठाए गए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विश्वविद्यालयों में नियुक्ति और अकादमिक मूल्यांकन से संबंधित नियमों में UGC के मानकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि नई व्यवस्था से बिहार के PhD और उच्च डिग्रीधारी अभ्यर्थियों को नुकसान हो सकता है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों या विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया इस प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध नहीं है।
PAT और BET परीक्षा शुरू कराने की मांग
आंदोलनकारियों ने अंगिका, भोजपुरी और मगही विषयों के लिए PAT आयोजित कराने की मांग भी उठाई। इसके साथ ही सभी विषयों के लिए BET परीक्षा शुरू करने की मांग की गई है।
प्रदर्शनकारियों की अन्य प्रमुख मांगों में गेस्ट फैकल्टी के समायोजन और विश्वविद्यालय से डिग्री महाविद्यालयों को अलग नहीं करने की मांग भी शामिल है।
सैकड़ों प्रदर्शनकारी हुए शामिल
पुतला दहन कार्यक्रम में डॉ. मुकेश कुमार सिंह, डॉ. विभुरंजन, डॉ. रवि कुमार, डॉ. देवनन्दन यादव, चंदन कुमार, आशीष कुमार, डॉ. विशाल सिंह, सिद्धार्थ पटेल, मो. नेमतुल्ला, डॉ. हिमांशु यादव, डॉ. अंकित तिवारी, डॉ. विभाग रानी, डॉ. शोभा कुमारी, वंदना सिंह, डॉ. सूची स्मिता और डॉ. स्नेहा कुमारी समेत बड़ी संख्या में आंदोलनकारी शामिल हुए।
एसोसिएशन के अनुसार, कुमुद पटेल, अभिषेक मेहता और बिक्कू सिंह प्रधान आमरण अनशन पर आठवें दिन भी डटे हुए हैं। आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल की मांग की है।
आंदोलन आगे बढ़ने के संकेत
PhD धारकों और रिसर्च स्कॉलर्स से जुड़े इस आंदोलन में भर्ती नियमों, शैक्षणिक योग्यता के मूल्यांकन और उम्र सीमा जैसे मुद्दे प्रमुखता से सामने आए हैं। अब नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग और राजभवन की ओर से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर क्या कदम उठाया जाता है।
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