Surya Grahan 2026: आज लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, जानें भारत में दिखेगा या नहीं और क्या होगा सूतक काल

Surya Grahan 2026: 12 अगस्त के पूर्ण सूर्य ग्रहण का समय, भारत में दृश्यता, सूतक काल और किन देशों में दिखेगा ग्रहण, जानें पूरी जानकारी।

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12 अगस्त 2026 को होने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।

Highlight
12 अगस्त को साल 2026 का आखिरी सूर्य ग्रहण, भारत में नहीं दिखेगा पूरा नजारा।
ग्रहण का पूरा चरण ग्रीनलैंड, आइसलैंड, रूस और स्पेन समेत कुछ इलाकों में दिखाई देगा।
भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने से सूतक काल को लेकर क्या है धार्मिक मान्यता? जानें पूरी जानकारी।
सूर्य ग्रहण का वैश्विक समय 15:34 UTC से 19:57 UTC तक, जानें भारत के समय के हिसाब से पूरा टाइमलाइन।
ग्रहण देखने से पहले आंखों की सुरक्षा का रखें ध्यान, NASA ने बताए सुरक्षित तरीके।

Surya Grahan 2026 Timing in India: साल 2026 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण आज, 12 अगस्त 2026 को होने जा रहा है। यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) होगा। खगोलीय गणना के अनुसार ग्रहण का वैश्विक चरण 15:34 UTC के आसपास शुरू होगा और 19:57 UTC के आसपास समाप्त होगा। हालांकि, इसका पूरा नजारा हर जगह नहीं दिखाई देगा।

भारत में रहने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आज का सूर्य ग्रहण भारत से दिखाई देगा? जवाब है—भारत में यह ग्रहण देखने योग्य नहीं होगा। ग्रहण की पूर्णता का मुख्य क्षेत्र ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों से होकर गुजरता है।

आज कितने बजे लगेगा सूर्य ग्रहण?

वैश्विक स्तर पर 12 अगस्त के सूर्य ग्रहण की शुरुआत करीब 15:34 UTC पर होगी। पूर्ण ग्रहण का चरण लगभग 16:58 UTC से शुरू होगा और वैश्विक अधिकतम ग्रहण करीब 17:46 UTC पर होगा। अंतिम आंशिक चरण लगभग 19:57 UTC पर समाप्त होगा।

भारतीय समय (IST) में ये वैश्विक चरण लगभग रात 9:04 बजे से 1:27 बजे के बीच आते हैं। लेकिन इन समयों का मतलब यह नहीं है कि भारत के आसमान में सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। उस समय भारत में सूर्य दिखाई देने की स्थिति ही नहीं होगी, इसलिए भारतीय दर्शक इसे सीधे आकाश में नहीं देख पाएंगे।

क्या भारत में सूर्य ग्रहण दिखाई देगा?
नहीं। भारत में 12 अगस्त 2026 का पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा।

NASA के अनुसार इस ग्रहण की पूर्णता ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, स्पेन और पुर्तगाल के एक छोटे हिस्से में दिखाई देगी। इसके अलावा यूरोप, उत्तरी अमेरिका और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका के कई हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा।

यही वजह है कि भारत के सूर्य ग्रहण देखने वाले लोगों को इस बार प्रत्यक्ष खगोलीय नजारा देखने का मौका नहीं मिलेगा।

सूर्य ग्रहण क्या होता है?
सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। इस स्थिति में चंद्रमा की छाया पृथ्वी की सतह पर पड़ती है। जिस क्षेत्र में चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है, वहां पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देता है।

12 अगस्त 2026 को होने वाला ग्रहण इसी वजह से खास है, क्योंकि कुछ क्षेत्रों में चंद्रमा सूर्य के चमकीले हिस्से को पूरी तरह ढक देगा और कुछ समय के लिए दिन के समय रात जैसा दृश्य बन सकता है। NASA के मुताबिक पूर्णता का चरण अधिकांश स्थानों पर दो मिनट से कम समय का होगा।

दुनिया में कहां दिखाई देगा सूर्य ग्रहण?
12 अगस्त के पूर्ण सूर्य ग्रहण की पट्टी मुख्य रूप से इन क्षेत्रों से होकर गुजरेगी:

  • ग्रीनलैंड
  • आइसलैंड
  • उत्तरी रूस
  • स्पेन
  • पुर्तगाल का छोटा हिस्सा

इसके अलावा यूरोप, कनाडा, अमेरिका के उत्तरी हिस्सों और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका के कई क्षेत्रों में आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देगा।

स्पेन और आइसलैंड में इस खगोलीय घटना को लेकर खास उत्साह देखा गया है। Reuters के अनुसार आइसलैंड और स्पेन में बड़ी संख्या में लोग ग्रहण देखने की तैयारी कर रहे हैं।

क्या भारत में सूतक काल लगेगा?
भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल को लेकर अलग-अलग मत हो सकते हैं। सामान्य धार्मिक परंपरा में सूतक को ग्रहण की स्थानीय दृश्यता से जोड़ा जाता है। इस ग्रहण के भारत में दिखाई नहीं देने के कारण आम तौर पर भारत में सूतक काल लागू नहीं माना जाता।

हालांकि, सूतक एक धार्मिक और परंपरागत अवधारणा है, वैज्ञानिक घटना नहीं। इसलिए अलग-अलग धार्मिक परंपराओं या पंचांगों में नियम अलग हो सकते हैं।

ग्रहण के दौरान खाना-पीना बंद करना जरूरी है?
वैज्ञानिक दृष्टि से सूर्य ग्रहण के दौरान खाना या पानी पीना बंद करने का कोई प्रमाणित स्वास्थ्य-आधारित कारण नहीं है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को अपनी सामान्य जरूरत के अनुसार भोजन और पानी लेते रहना चाहिए।

ग्रहण को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे वायरल होते हैं। किसी भी दावे को वैज्ञानिक तथ्य मानने से पहले विश्वसनीय स्रोत की जानकारी जरूर जांचें।

सूर्य ग्रहण को सीधे देखने से बचें
जहां सूर्य ग्रहण दिखाई दे रहा हो, वहां सूर्य को नंगी आंखों से सीधे नहीं देखना चाहिए। NASA के अनुसार आंशिक ग्रहण के दौरान सूर्य की ओर देखने के लिए प्रमाणित सोलर व्यूइंग ग्लास या सुरक्षित सोलर फिल्टर का इस्तेमाल जरूरी है। साधारण सनग्लास सूर्य की तेज रोशनी से आंखों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं होते।

पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान भी बिना सुरक्षा के सीधे सूर्य को देखने की अनुमति केवल उस बहुत छोटे समय के लिए होती है जब सूर्य पूरी तरह चंद्रमा से ढका हो; पूर्णता खत्म होते ही आंखों की सुरक्षा जरूरी हो जाती है।

ज्योतिष में सूर्य ग्रहण को कैसे देखा जाता है?
ज्योतिषीय परंपराओं में सूर्य को आत्मविश्वास, नेतृत्व, प्रतिष्ठा और ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए सूर्य ग्रहण को कई ज्योतिषीय परंपराओं में महत्वपूर्ण माना जाता है।

हालांकि, ग्रहण से राजनीति, भूकंप, प्राकृतिक आपदा, दुर्घटना या किसी व्यक्ति के भविष्य पर निश्चित प्रभाव पड़ने के दावों को वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जाता। ऐसे दावों को खबर में तथ्य की तरह प्रस्तुत करने के बजाय ज्योतिषीय मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

इसी तरह किसी व्यक्ति की राशि देखकर उसके स्वास्थ्य, करियर या भविष्य के बारे में निश्चित भविष्यवाणी करना वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तरीका नहीं है।

12 अगस्त का सूर्य ग्रहण क्यों है खास?
2026 का यह सूर्य ग्रहण इसलिए खास है क्योंकि यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण है और इसकी पूर्णता की पट्टी यूरोप के कुछ हिस्सों तक पहुंच रही है। NASA के अनुसार ग्रीनलैंड, आइसलैंड और स्पेन सहित कई क्षेत्रों में लोग इसे प्रत्यक्ष रूप से देख सकेंगे।

भारत में यह घटना सीधे दिखाई नहीं देगी, लेकिन भारतीय दर्शक वैज्ञानिक संस्थाओं और आधिकारिक लाइव स्ट्रीम के माध्यम से इस दुर्लभ खगोलीय घटना को देख सकते हैं।

निष्कर्ष
12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण साल की प्रमुख खगोलीय घटनाओं में से एक है। भारत में इसे सीधे देखने का अवसर नहीं मिलेगा, जबकि ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा।

ग्रहण को लेकर धार्मिक मान्यताओं और वैज्ञानिक तथ्यों के बीच अंतर समझना जरूरी है। जहां धार्मिक परंपराएं अपनी मान्यताओं के अनुसार नियम बताती हैं, वहीं विज्ञान ग्रहण को सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी की स्थिति से जुड़ी एक प्राकृतिक खगोलीय घटना के रूप में समझाता है।

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