Highlight
- बिहार चुनाव के बाद तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए दोबारा चुनाव की मांग की।
- तेजस्वी ने दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों का हवाला देते हुए CEC ज्ञानेश कुमार से जवाब मांगा।
- RJD नेता ने बिहार और पश्चिम बंगाल में नए सिरे से चुनाव कराने की मांग उठाई।
- SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच विवाद एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।
- 1995 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देकर तेजस्वी ने चुनाव आयुक्तों की भूमिका और अधिकारों पर सवाल उठाए।
पटना, 23 सितंबर 2026: बिहार विधानसभा चुनाव के बाद चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने बुधवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
तेजस्वी यादव ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज को लेकर दो अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां सामने आई हैं। इसी के आधार पर उन्होंने बिहार और पश्चिम बंगाल में दोबारा चुनाव कराने की मांग की।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों पर कहा है कि आयोग के भीतर अलग-अलग विचार और टिप्पणियां आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा हैं तथा SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
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दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का तेजस्वी ने किया जिक्र
प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव ने उन मीडिया रिपोर्टों का हवाला दिया, जिनमें चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा चुनावी प्रक्रिया और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्ति जताने की बात सामने आई है।
रिपोर्टों के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले करीब 10 महीनों में कई मौकों पर SIR और मतदाता सूची से जुड़े निर्णयों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
तेजस्वी यादव ने कहा कि इन आपत्तियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
बिहार और पश्चिम बंगाल में फिर चुनाव की मांग
तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बिहार और पश्चिम बंगाल में दोबारा चुनाव कराने की मांग रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया का इस्तेमाल बीजेपी के पक्ष में किया गया।
यह तेजस्वी यादव और RJD का राजनीतिक आरोप है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि के तौर पर कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष इस रिपोर्ट में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है। चुनाव आयोग ने दूसरी ओर SIR और उससे जुड़े निर्णयों को लेकर संस्थागत प्रक्रिया का बचाव किया है।
SIR को लेकर पहले भी RJD उठा चुका है सवाल
बिहार में Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर RJD पहले से ही चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाता रहा है। तेजस्वी यादव ने कहा कि पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर पहले भी आवाज उठाई थी और मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया था।
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की समीक्षा करना और पात्र तथा अपात्र मतदाताओं से जुड़े रिकॉर्ड को अपडेट करना है। बिहार और पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर यह प्रक्रिया राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा रही है।
पश्चिम बंगाल में भी SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने और बाद में अपील किए जाने का मामला सामने आया है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 27.16 लाख हटाए गए मतदाताओं में से 22 लाख से अधिक ने नाम बहाल कराने के लिए अपील की।
1995 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला
तेजस्वी यादव ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में वर्ष 1995 के T.N. Seshan बनाम Union of India मामले का भी उल्लेख किया।
सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई 1995 के फैसले में बहु-सदस्यीय चुनाव आयोग की व्यवस्था और चुनाव आयुक्तों की भूमिका पर विस्तार से विचार किया था। फैसले में कहा गया था कि Election Commissioners भी आयोग का हिस्सा हैं और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भूमिका है। मतभेद की स्थिति में बहुमत से निर्णय लेने की व्यवस्था पर भी फैसला चर्चा करता है।
इसलिए इस फैसले को लेकर तेजस्वी यादव ने वर्तमान चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
EVM नियमों को लेकर भी तेजस्वी ने उठाया सवाल
तेजस्वी यादव ने चुनाव परिणाम के बाद EVM को सुरक्षित रखने की अवधि से जुड़े नियमों में बदलाव का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे चुनाव प्रक्रिया से जुड़े संभावित सबूतों की जांच मुश्किल हो सकती है।
इस तरह के आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं पेश किया जा सकता। EVM और चुनावी रिकॉर्ड से संबंधित नियमों तथा उनके कानूनी प्रावधानों की आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने कहा कि अलग-अलग विचार और टिप्पणियां किसी संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती हैं। आयोग के अनुसार, SIR समेत संबंधित फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।
यानी एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि चुनाव आयोग अपनी निर्णय प्रक्रिया को संस्थागत और सर्वसम्मत बता रहा है।
तेजस्वी बोले- जहां अन्याय होगा, वहां आवाज उठाएंगे
तेजस्वी यादव ने कहा कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर कई गंभीर आरोप लगाए और बिहार तथा पश्चिम बंगाल में नए सिरे से चुनाव कराने की मांग दोहराई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में RJD नेता शक्ति सिंह यादव और एजाज अहमद भी मौजूद रहे।
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