Smriti Mandhana: लीडरशिप में बदलाव: हरमनप्रीत कौर ने भारत को कई खिताब जिताने के बाद कप्तानी छोड़ी, जिससे मंधाना के सभी फ़ॉर्मेट की कप्तान बनने का रास्ता साफ़ हुआ।
मंधाना की काबिलियत: 10,000 से ज़्यादा रन और WPL खिताबों के साथ, मंधाना इस भूमिका के लिए साबित हो चुकी लीडरशिप और बेहतरीन बल्लेबाज़ी का हुनर लेकर आई हैं।
आने वाली चुनौती: उनकी पहली परीक्षा 16 अक्टूबर से शुरू होने वाली ज़िम्बाब्वे T20I और ODI सीरीज़ होगी, जहाँ वह हाल की सफलताओं को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगी।
हरमनप्रीत के शानदार कार्यकाल के बाद मंधाना ने संभाली कमान
स्मृति मंधाना को भारत की सभी फ़ॉर्मेट की कप्तान तब बनाया गया जब हरमनप्रीत कौर ने 2016 से टीम की कप्तानी करने के बाद पद छोड़ने का फ़ैसला किया। हरमनप्रीत के कार्यकाल में भारत की 2025 में ऐतिहासिक ODI वर्ल्ड कप जीत, तीन T20 एशिया कप खिताब और दो एशियन गेम्स गोल्ड मेडल शामिल थे। लीडरशिप में यह बदलाव BCCI के साथ समीक्षा बैठक के बाद शुरू किया गया, जो भविष्य की चुनौतियों के लिए टीम को तैयार करने की दिशा में एक रणनीतिक बदलाव है।
मंधाना की साबित हो चुकी लीडरशिप और बल्लेबाज़ी का दबदबा
2013 में डेब्यू करने वाली मंधाना ने 10,000 से ज़्यादा रन बनाए हैं और महिला क्रिकेट के सभी फ़ॉर्मेट में सबसे ज़्यादा शतक लगाने का रिकॉर्ड उनके नाम है। उन्होंने कुछ मैचों में भारत की कप्तानी की है और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 2024 और 2026 में विमेंस प्रीमियर लीग का खिताब जिताया है। उनके शांत, संयमित अंदाज़ और रणनीतिक समझ की तारीफ़ मिताली राज और BCCI ने की है, जिससे वह इस भूमिका के लिए एक मज़बूत दावेदार बन गई हैं।
ऐतिहासिक समानताएँ और बदलाव का समय
मंधाना को कप्तान बनाए जाने के समय की तुलना पहले हुए लीडरशिप बदलावों से की जा रही है; मिताली राज का कहना है कि यह पहले भी हो सकता था। 2022 में मिताली से हरमनप्रीत को कप्तानी सौंपने के समय भी ऐसी ही खींचतान हुई थी, जिससे गुटबाज़ी हो गई थी। मौजूदा बदलाव का मकसद ऐसी समस्याओं से बचना है; उम्मीद है कि हरमनप्रीत खेलना जारी रखेंगी और मंधाना की लीडरशिप का समर्थन करेंगी। पहला असाइनमेंट और रणनीतिक नज़रिए
मंधाना के सामने पहली चुनौती ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ घरेलू सीरीज़ होगी, जिसमें 16 अक्टूबर से शुरू होने वाले तीन T20I और तीन ODI मैच शामिल हैं। उन्हें एक ऐसी टीम मिली है जिसने हाल ही में वर्ल्ड कप में सफलता और एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता है, और अब आने वाले ग्लोबल टूर्नामेंट्स में अच्छा प्रदर्शन करने की उनसे काफ़ी उम्मीदें हैं। उनका ध्यान मुख्य रूप से भूमिकाओं को स्पष्ट करने, सही कॉम्बिनेशन बनाने और अगली पीढ़ी को तैयार करने पर होगा, साथ ही वे बड़े ICC इवेंट्स पर भी नज़र रखेंगी।
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