नेहा बोरा रिहा, बाहर आते ही बताई हिरासत की कहानी; अभिजीत दीपके पर पुलिस की कार्रवाई

8 Min Read
नेहा बोरा की रिहाई और दिल्ली में प्रदर्शन से जुड़ी खबर

हाइलाइट्स

  • नेहा बोरा रिहा: आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष को दिल्ली पुलिस की हिरासत से शनिवार सुबह छोड़ा गया।
  • हिरासत का अनुभव बताया: नेहा बोरा ने दावा किया कि उन्हें कई घंटों तक वकील से बातचीत करने में परेशानी हुई।
  • अभिजीत दीपके पर कार्रवाई: कॉकरोच जनता पार्टी की लीगल हेड के अनुसार, दीपके को गिरफ्तार किया गया और उन्हें एसईएम कोर्ट में पेश किया जाना था।
  • ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च: दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले नेहा बोरा और अभिजीत दीपके को हिरासत में लिए जाने का मामला चर्चा में है।
  • SIR को लेकर उठाए सवाल: नेहा बोरा ने चुनाव आयोग, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मतदान के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए।

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को शनिवार सुबह हिरासत से रिहा कर दिया गया।

शुक्रवार शाम ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था।

नेहा ने अपने X (पहले ट्विटर) अकाउंट के जरिए अपनी रिहाई की जानकारी दी।

उन्होंने लिखा, “मुझे रिहा कर दिया गया है। मैं अभिजीत दीपके की रिहाई की मांग करती हूं। इसके अलावा, दिल्ली पुलिस को उन सभी अन्य प्रदर्शनकारियों को भी रिहा करना चाहिए जिन्हें हिरासत में लिया गया है। लोकतंत्र और संविधान के लिए लड़ना कोई अपराध नहीं हो सकता!”

इससे पहले, देर रात तक उनके समर्थक दिल्ली पुलिस से उनके ठिकाने के बारे में पूछते रहे थे।

आधी रात के बाद पता चला कि उन्हें आर.के. पुरम पुलिस स्टेशन में रखा गया था। उनके X अकाउंट पर किए गए एक पोस्ट के अनुसार, उन्हें आर.के. पुरम पुलिस स्टेशन में पांच घंटे तक रखा गया था।

समाचार एजेंसी ANI ने X पर उनकी रिहाई का एक वीडियो पोस्ट किया।

वीडियो में उनके साथ चार-पांच अन्य लोग भी दिखाई दे रहे हैं। जब उनसे टिप्पणी मांगी गई, तो उन्होंने कहा, “मैं क्या कहूं?” और वहां से चली गईं।

AISA, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन का छात्र संगठन है। उनकी रिहाई पर प्रतिक्रिया देते हुए, CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने X पर लिखा, “नेहा फिर से आजाद हैं! घंटों तक उन्हें अवैध रूप से, अपहरण जैसी हिरासत में रखने के बाद, दिल्ली पुलिस उन्हें रिहा करने के लिए मजबूर हुई है।” “यह हमारी कानूनी टीम के लगातार प्रयासों, हमारे सभी साथियों की सतर्कता, जागरूक नागरिक समाज और सक्रिय विपक्ष की कोशिशों से संभव हो पाया है।”

“पुलिस की ऐसी गैर-जिम्मेदाराना, कानून-विरोधी, प्रतिशोधपूर्ण और क्रूर हरकतें जनता के प्रतिरोध को कमजोर नहीं करेंगी; बल्कि, ये इसे और मजबूत, एकजुट और दृढ़ बनाएंगी।” ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) की संस्थापक नेहा बोरा और अभिजीत दिपके को 16 अक्टूबर की शाम को हिरासत में ले लिया गया था।

हिरासत से रिहा होने से पहले, नेहा के वकील सुपांत सिन्हा ने कहा, “नेहा को आर.के. पुरम पुलिस स्टेशन में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है। उन्हें अपने वकील से बात करने की भी अनुमति नहीं दी जा रही है।”

यह भी पढ़ें : 2027 Assembly Elections: 5 राज्यों में चुनाव की तैयारी तेज, EVM जांच शुरू; तारीखों पर बड़ा अपडेट

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की लीगल हेड रत्ना सिंह ने ‘X’ पर लिखा कि अभिजीत दिपके को गिरफ्तार कर लिया गया है और उन्हें SEM (स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट) कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा।

रत्ना सिंह ने बताया कि उन्हें अभी भी अभिजीत के ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है, और वकीलों को उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा है।

इससे पहले, रत्ना सिंह ने ‘X’ पर लिखा था, “घटनाक्रम पर गौर करें: दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया। सभी लोगों की निगरानी की गई, उन्हें हिरासत में लिया गया और बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। दिल्ली पुलिस को तुरंत बताना चाहिए कि अभिजीत और नेहा अभी कहाँ हैं।”

“किसी को भी उनके परिवार, वकीलों या संबंधित लोगों को उनके ठिकाने और कानूनी स्थिति की जानकारी दिए बिना घंटों तक हिरासत में नहीं रखा जाना चाहिए। नेहा और अभिजीत कहाँ हैं? दिल्ली पुलिस को इसका जवाब देना चाहिए।”

हिरासत से रिहा होने के बाद नेहा ने क्या कहा? रिहा होने के बाद नेहा ने कहा, “कानून-व्यवस्था की हर तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आम नागरिकों के साथ ऐसा बर्ताव किया जा रहा है जैसे वे कोई खतरनाक, पक्के अपराधी हों। इस देश में लंबे समय से ऐसा ही हो रहा है।”

नेहा ने आगे कहा, “अभी चल रहे आंदोलन से साफ हो गया है कि लोगों को किस तरह हिरासत में लिया जा रहा है। दिन हो या शाम, लोगों को हिरासत में ले लिया जाता है, पूरी रात पुलिस स्टेशन में रखा जाता है और अगले दिन सुबह या शाम को ही छोड़ा जाता है। यह किस अधिकार से किया जा रहा है? किस कानून या आदेश के तहत हिरासत में लिए गए लोगों को पूरी रात पुलिस स्टेशन में रखा जा सकता है?” “कानूनी तौर पर, लोगों—खासकर महिलाओं—को सूर्यास्त से पहले रिहा कर दिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। इसके अलावा, ‘अराजकता और अव्यवस्था’ का एक नया नैरेटिव गढ़ा जा रहा है। कैसी अराजकता और अव्यवस्था? वैसी ही, जैसी आपने खुद मध्य दिल्ली में फैला रखी है? दिल्ली के लोग चैन की सांस भी नहीं ले पा रहे हैं; काम पर जाने के लिए वे जिस भी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं, वह बंद है।”

“आप पूरे देश में अराजकता और अव्यवस्था फैला रहे हैं। कृपया, भारत के लोगों को बख्श दें। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करें और मौजूदा प्रक्रिया को रोकें, ताकि इस देश के आम नागरिक चैन की सांस ले सकें, कुछ सुकून पा सकें और यह सुनिश्चित हो सके कि उनका वोट देने का अधिकार सुरक्षित रहे।”

उन्होंने आगे कहा, “पुलिस ने मुझसे मेरा नाम, पता और अन्य निजी जानकारियां मांगीं। काफी देर तक, उन्होंने मुझे बोलने या किसी कानूनी सलाहकार (वकील) से बात करने तक की इजाजत नहीं दी। हमारे वकीलों ने मुझसे संपर्क करने की कोशिश में 5-6 घंटे बिता दिए। जब ​​हमने फोन के जरिए उनसे संपर्क किया, तब जाकर उन्हें मुझसे मिलने की अनुमति मिली। ये लोग लंबे समय से ऐसा ही बर्ताव करते आ रहे हैं।”

यह भी पढ़ें : CJP Protest: सौरव दास और आशुतोष रंका जेल भेजे गए; CJP ज़मानत की तैयारी में

यह भी पढ़ें : Bihar Politics: CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ RJD का प्रदर्शन, बिहार-बंगाल समेत 5 राज्यों में फिर चुनाव की मांग

यह भी पढ़ें : Tejashwi Yadav का बड़ा दावा: बिहार और बंगाल में फिर हों चुनाव, Election Commission पर उठाए गंभीर सवाल

यह भी पढ़ें : नोएडा में ‘द स्टार्टअप फ्यूजन’ की फाउंडर शांभवी झा ने किया ‘वूमेन हू बिल्ड’ मीटअप का भव्य आयोजन

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Exit mobile version