CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग: मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया क्या है?

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मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संविधान में विशेष प्रक्रिया और संसद के दोनों सदनों में निर्धारित बहुमत जरूरी है।
  • हाइलाइट लाइनें
  • ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग के बीच जानिए मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने का संवैधानिक तरीका।
  • क्या सिर्फ राजनीतिक आरोपों के आधार पर CEC को हटाया जा सकता है? संविधान में क्या है नियम?
  • लोकसभा में 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर—प्रस्ताव की प्रक्रिया ऐसे शुरू होती है।
  • मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में किस तरह का बहुमत जरूरी है?
  • अप्रैल 2026 में पहले नोटिस खारिज हुए थे, अब विपक्ष फिर प्रस्ताव लाने की तैयारी में—पूरा मामला समझिए।

Patna: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग एक बार फिर चर्चा में है। चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़े फैसलों पर उठे सवालों के बाद विपक्षी दलों ने उनके खिलाफ संसद में प्रस्ताव लाने की बात कही है। लेकिन क्या किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल राजनीतिक मांग के आधार पर हटाया जा सकता है? संविधान में इसके लिए कौन-सी प्रक्रिया तय की गई है?

यह पूरा मामला चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों से जुड़ी एक खोजी रिपोर्ट के बाद सामने आया। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले कुछ महीनों में एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों की प्रक्रिया पर कई बार आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ मामलों में चुनाव आयुक्तों ने फैसलों और दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाए थे।

हालांकि, निर्वाचन आयोग ने कहा कि किसी बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय, सुझाव और टिप्पणियां आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग के मुताबिक, अंतिम फैसले विचार-विमर्श के बाद लिए जाते हैं। इसलिए रिपोर्ट में सामने आई आपत्तियों और आयोग के आधिकारिक पक्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है।

विपक्ष की क्या है मांग?
रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग उठाई। द इंडियन एक्सप्रेस ने कांग्रेस सूत्रों के हवाले से बताया कि विपक्षी दल संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं और इसके लिए कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है। रिपोर्ट के समय प्रस्ताव तैयार किए जाने की बात कही गई थी; इसे संसद में स्वीकार किया जा चुका प्रस्ताव नहीं माना जाना चाहिए।

इससे पहले भी मार्च 2026 में विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में नोटिस दिए थे। लोकसभा के नोटिस पर 130 और राज्यसभा के नोटिस पर 63 सांसदों के हस्ताक्षर बताए गए थे। दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों ने 6 अप्रैल 2026 को इन नोटिसों को स्वीकार नहीं किया था।

विपक्ष ने अपने पहले नोटिस में चुनाव आयोग के कामकाज, एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर आरोप लगाए थे। ये विपक्ष के आरोप थे, न कि हटाने की प्रक्रिया में साबित किए गए निष्कर्ष।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कैसे होती है?
भारत में चुनाव कराने और मतदाता सूची से जुड़े संवैधानिक कार्यों की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग की है। मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 324 तथा मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के प्रावधानों के तहत होती है।

2023 के कानून के मुताबिक, राष्ट्रपति नियुक्ति करते हैं। इसके लिए सिफारिश तीन सदस्यीय चयन समिति करती है। इस समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्रिमंडल का एक मंत्री शामिल होता है। नियुक्ति के लिए चयनित व्यक्ति भारत सरकार के सचिव स्तर के पद पर रह चुका हो या समकक्ष पद पर रहा हो, ईमानदार हो और चुनाव प्रबंधन का ज्ञान व अनुभव रखता हो।

कानून के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल छह साल या 65 वर्ष की आयु तक होता है—जो पहले पूरा हो।

मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों का वेतन
2023 के कानून में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के वेतन और सेवा शर्तों के प्रावधान किए गए हैं। कानून में वेतन को केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिव के वेतन के बराबर रखने की व्यवस्था है। हालांकि वेतन समान होने का अर्थ यह नहीं है कि दोनों पदों की नियुक्ति, जिम्मेदारियां या संवैधानिक स्थिति एक जैसी हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त को कैसे हटाया जा सकता है?
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया संविधान में विशेष रूप से निर्धारित है। अनुच्छेद 324(5) के तहत उन्हें उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिन पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है। अन्य चुनाव आयुक्तों और क्षेत्रीय आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश के बिना पद से नहीं हटाया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने से संबंधित अनुच्छेद 124(4) के तहत आधार हैं—साबित कदाचार या अक्षमता। केवल किसी फैसले से असहमति या राजनीतिक आरोप अपने-आप में हटाने का अंतिम आधार नहीं बन जाते। आरोपों की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत जांच और संसद में निर्धारित बहुमत जरूरी है।

हटाने की प्रक्रिया के प्रमुख चरण

  1. संसद में नोटिस: प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों या राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ दिया जा सकता है।
  2. नोटिस पर विचार: संबंधित सदन के पीठासीन अधिकारी नोटिस स्वीकार या अस्वीकार करने पर निर्णय लेते हैं।
  3. जांच: प्रस्ताव स्वीकार होने पर आरोपों की जांच के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत समिति गठित की जाती है।
  4. संसद में विशेष बहुमत: हटाने का प्रस्ताव दोनों सदनों में कुल सदस्य संख्या के बहुमत और उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पारित होना चाहिए।
  5. राष्ट्रपति का आदेश: दोनों सदनों में प्रस्ताव पारित होने के बाद राष्ट्रपति पद से हटाने का आदेश जारी करते हैं।

क्या ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पहले भी प्रस्ताव आया था?
हां। विपक्षी दलों ने 12 मार्च 2026 को लोकसभा और राज्यसभा में ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए नोटिस दिए थे। लोकसभा के नोटिस पर 130 और राज्यसभा के नोटिस पर 63 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे। 6 अप्रैल 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने इन नोटिसों को स्वीकार नहीं किया।

इसके बाद सितंबर में द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के आधार पर विपक्ष ने नए प्रस्ताव की तैयारी की बात कही। इस तरह मौजूदा राजनीतिक मांग और संवैधानिक रूप से पद से हटाने की प्रक्रिया दो अलग बातें हैं। प्रस्ताव लाने की घोषणा या नोटिस देना, अपने-आप में पद से हटाए जाने के बराबर नहीं है।

निष्कर्ष
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया संविधान में कठिन रखी गई है, ताकि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुरक्षित रहे। विपक्षी दलों की मांग और आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों पर राजनीतिक बहस जारी रह सकती है, लेकिन पद से हटाने के लिए संविधान में तय आधार, जांच और संसद के विशेष बहुमत की प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है।

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