Sonam Wangchuk Hunger Strike: भूख हड़ताल का इतिहास: महात्मा गांधी, भगत सिंह, ममता बनर्जी से सोनम वांगचुक तक किसने क्यों किया अनशन?

Sonam Wangchuk Hunger Strike: सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल चर्चा में है। जानिए महात्मा गांधी, भगत सिंह, अन्ना हजारे, इरोम शर्मिला, ममता बनर्जी और अन्य ऐतिहासिक अनशनों की कहानी।

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सोनम वांगचुक से पहले महात्मा गांधी, भगत सिंह, अन्ना हजारे और कई अन्य आंदोलनकारियों ने भी भूख हड़ताल का रास्ता अपनाया था।
  • Highlights
  • सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के बाद फिर चर्चा में आया अनशन का इतिहास।
  • महात्मा गांधी, भगत सिंह और अन्ना हजारे जैसे नेताओं ने भी किया था उपवास।
  • इरोम शर्मिला का 16 साल लंबा अनशन दुनिया के सबसे लंबे आंदोलनों में शामिल।
  • कई भूख हड़तालों ने बदली सरकारों की नीतियां और देश की राजनीति।
  • जानिए भारत के सबसे चर्चित और ऐतिहासिक अनशनों की पूरी कहानी।

Sonam Wangchuk Hunger Strike: नई दिल्ली | भारत में भूख हड़ताल (Hunger Strike) लंबे समय से लोकतांत्रिक और अहिंसक विरोध का एक प्रभावी माध्यम रही है। जब संवाद और विरोध के अन्य तरीके अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाए, तब कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्वतंत्रता सेनानियों और राजनीतिक नेताओं ने अपनी मांगों को लेकर अनशन का रास्ता अपनाया।

हाल के दिनों में सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल एक बार फिर चर्चा का विषय बनी है। इसी के साथ देश के उन ऐतिहासिक अनशनों की भी चर्चा तेज हो गई है, जिन्होंने राजनीति, समाज और नीतियों पर गहरा प्रभाव डाला।

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नोट: नीचे दी गई जानकारी विभिन्न ऐतिहासिक घटनाओं और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिकॉर्ड पर आधारित है। वर्तमान में सोनम वांगचुक के आंदोलन से जुड़े उद्देश्य और घटनाक्रम की जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार प्रस्तुत की गई है।
  1. सोनम वांगचुक

जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक हाल के दिनों में अपनी भूख हड़ताल को लेकर चर्चा में रहे। उनकी सेहत को लेकर मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा, जहां अदालत ने नियमित मेडिकल जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इससे पहले भी वे लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर लंबा अनशन कर चुके हैं।

  1. अन्ना हजारे

साल 2011 में अन्ना हजारे ने जन लोकपाल कानून की मांग को लेकर दिल्ली के रामलीला मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की थी। इस आंदोलन को देशभर में व्यापक जनसमर्थन मिला और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा जनआंदोलन खड़ा हुआ।

  1. इरोम शर्मिला

इरोम चानू शर्मिला ने सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम (AFSPA) को हटाने की मांग को लेकर वर्ष 2000 में अनशन शुरू किया था। उनका आंदोलन लगभग 16 वर्षों तक चला और इसे दुनिया की सबसे लंबी भूख हड़तालों में गिना जाता है।

  1. ममता बनर्जी

ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के सिंगूर में भूमि अधिग्रहण के विरोध में भूख हड़ताल की थी। यह आंदोलन राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ और भूमि अधिग्रहण पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ी।

  1. मेधा पाटकर

मेधा पाटकर ने नर्मदा बचाओ आंदोलन के तहत सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और अधिकारों की मांग को लेकर कई बार भूख हड़ताल की।

  1. पोटी श्रीरामुलु

पोटी श्रीरामुलु ने तेलुगु भाषी लोगों के लिए अलग राज्य की मांग को लेकर आमरण अनशन किया। 58 दिनों के उपवास के बाद उनकी मृत्यु हुई, जिसके बाद आंध्र राज्य के गठन का रास्ता प्रशस्त हुआ।

  1. महात्मा गांधी

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कई बार उपवास किया। उनके उपवास सामाजिक सद्भाव, छुआछूत के खिलाफ अभियान और अहिंसक संघर्ष का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे।

  1. भगत सिंह

स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह और उनके साथियों ने लाहौर जेल में भारतीय कैदियों के साथ समान व्यवहार की मांग को लेकर भूख हड़ताल की थी। इस आंदोलन के दौरान क्रांतिकारी जतिन दास का 63 दिनों के उपवास के बाद निधन हो गया, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया।

भारत में भूख हड़ताल क्यों मानी जाती है प्रभावी?

भारतीय लोकतंत्र में भूख हड़ताल को अहिंसक विरोध का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। इसका उद्देश्य सरकार और समाज का ध्यान किसी मुद्दे की ओर आकर्षित करना होता है। हालांकि, ऐसे आंदोलनों के दौरान स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ जाते हैं, इसलिए अदालतें और प्रशासन समय-समय पर चिकित्सा निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश देते रहे हैं।

संपादकीय नोट (महत्वपूर्ण)

यह लेख ऐतिहासिक और समसामयिक सार्वजनिक घटनाओं पर आधारित एक व्याख्यात्मक (Explainer) रिपोर्ट है। विभिन्न आंदोलनों के उद्देश्य और परिणाम उस समय की परिस्थितियों तथा उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतों के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। वर्तमान घटनाक्रम से जुड़े किसी भी दावे या विवाद का अंतिम निष्कर्ष संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और न्यायिक/प्रशासनिक प्रक्रिया के अधीन होगा।

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