UGC Act 2026 नियमों पर Supreme Court के फैसले पर कुमार विश्वास का बड़ा बयान, क्या कहा पढ़िए?

UGC Act 2026: सुप्रीम कोर्ट ने नए UGC नियमों पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने नए नियमों के खिलाफ दायर तीन याचिकाओं पर केंद्र सरकार और UGC से 19 मार्च तक जवाब मांगा है।

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UGC Act 2026 नियमों पर Supreme Court के फैसले पर कुमार विश्वास का बड़ा बयान, क्या कहा पढ़िए? ( Photox.com/DrKumarVishwas/:)

UGC Act 2026: कवि कुमार विश्वास (Poet Kumar Vishwas) ने भी नए UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। इस समय भारत किसी भी तरह के बंटवारे को बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं है। ऐसे समय में सरकारों और नेताओं को भी किसी भी तरह की बंटवारे वाली लकीर खींचने से बचना चाहिए। यह सच है कि हमारे दलित, पिछड़े और वंचित दोस्तों ने सदियों से बहुत अत्याचार सहे हैं।

कहानीकार कुमार विश्वास ने भी नए UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। इस समय भारत किसी भी तरह के बंटवारे को बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं है। ऐसे समय में सरकारों और नेताओं को भी किसी भी तरह की बंटवारे वाली लकीर खींचने से बचना चाहिए। यह सच है कि हमारे दलित, पिछड़े और वंचित दोस्तों ने सदियों से बहुत अत्याचार सहे हैं।

‘सुप्रीम कोर्ट ने लाखों लोगों की भावनाओं को समझा’
कुमार विश्वास ने आगे कहा, “लोग यह कहने में हिचकिचाते हैं कि यह सब, जो पिछले हज़ार सालों में विदेशी आक्रमणकारियों के ज़रिए भारत में आया, जिन लोगों की ये परंपराएं थीं, उन्होंने भारत में ये बीज बोए। इससे छुटकारा पाने के लिए उपाय किए जा रहे हैं। ये उपाय पिछले 80 सालों में किए गए हैं और आगे भी किए जाते रहेंगे। लेकिन कोई भी निर्दोष व्यक्ति फंसा नहीं चाहिए, या किसी भी जाति, पंथ या धर्म के किसी भी व्यक्ति को किसी भी समुदाय में असहज महसूस नहीं होना चाहिए। मैं लाखों लोगों की भावनाओं को समझने के लिए सुप्रीम कोर्ट का आभार व्यक्त करता हूं। मुझे उम्मीद है कि राजनीति भी इसका कोई सकारात्मक समाधान निकालेगी।” कुमार विश्वास ने ये बातें नोएडा में मीडिया से बात करते हुए कहीं।

  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु:
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामला प्रथम दृष्टया अस्पष्ट है और इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।
  • इसका असर समाज के लिए खतरनाक रूप से विभाजनकारी भी हो सकता है। कोर्ट ने केंद्र और UGC से 19 मार्च तक जवाब मांगा।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “आर्टिकल 142 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, हम निर्देश देते हैं कि 2012 के नियम अगले आदेश तक लागू रहेंगे।”
  • वकील विष्णु शंकर जैन याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश हुए।
  • सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अलग-अलग जातियों के लिए अलग-अलग हॉस्टल जैसे उपायों पर कड़ी आपत्ति जताई।
  • चीफ जस्टिस ने कहा, “भगवान के लिए, ऐसा मत करो! हम सब साथ रहते हैं। अंतर-जातीय शादियां भी होती हैं।”
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