- Highlight
- बिहार सरकार ने सोशल मीडिया पर सरकारी विज्ञापन से जुड़े नियमों में बदलाव किया है।
- नए प्रावधानों में छोटे फॉलोअर और सब्सक्राइबर वाले सूचीबद्ध चैनलों को अतिरिक्त व्यूज की शर्तों में राहत दी गई है।
- YouTube के साथ Facebook, Instagram और X पर सक्रिय डिजिटल क्रिएटर्स भी इस व्यवस्था के दायरे में हैं।
- 30 दिन बाद आने वाले अतिरिक्त व्यूज पर भुगतान की सीमा अब सोशल मीडिया हैंडल की कैटेगरी के अनुसार तय होगी।
- A से D तक चार कैटेगरी में बंटे चैनलों के लिए अतिरिक्त भुगतान पाने की व्यूज सीमा अलग-अलग रखी गई है।
YouTubers: पटना, 21 अगस्त 2026: बिहार में सोशल मीडिया के जरिए सरकारी विज्ञापन हासिल करने वाले YouTube चैनल, Facebook पेज, Instagram हैंडल और अन्य डिजिटल क्रिएटर्स के लिए नियमों में बदलाव किया गया है। नए प्रावधानों में खास तौर पर छोटे फॉलोअर और सब्सक्राइबर वाले सोशल मीडिया हैंडल को अतिरिक्त भुगतान के लिए जरूरी व्यूज की शर्तों में राहत दी गई है।
इस बदलाव का सीधा असर उन सोशल मीडिया क्रिएटर्स पर पड़ सकता है जो बिहार सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के माध्यम से सरकारी विज्ञापन प्राप्त करते हैं। नए प्रावधानों में वीडियो विज्ञापन के 30 दिन बाद आने वाले अतिरिक्त व्यूज के आधार पर भुगतान की व्यवस्था को अलग-अलग कैटेगरी के अनुसार बदला गया है।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर YouTuber या Influencer को स्वतः सरकारी विज्ञापन या भुगतान मिलेगा। इसके लिए संबंधित नियमों के तहत पात्रता और सूचीबद्धता की शर्तें पूरी करनी होंगी।
छोटे चैनलों के लिए सबसे बड़ा बदलाव क्या है?
नए नियमों में 30 दिन के बाद आने वाले अतिरिक्त व्यूज के आधार पर अतिरिक्त भुगतान के लिए पहले की तुलना में अलग-अलग कैटेगरी के लिए अलग व्यूज सीमा तय की गई है।
पहले अतिरिक्त भुगतान के लिए एक समान व्यूज सीमा लागू थी। अब सोशल मीडिया हैंडल की फॉलोअर या सब्सक्राइबर संख्या के आधार पर बनाई गई कैटेगरी के अनुसार अतिरिक्त व्यूज की जरूरत तय की गई है।
यही बदलाव छोटे और मध्यम आकार के सोशल मीडिया चैनलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चार कैटेगरी में बांटे गए हैं सोशल मीडिया हैंडल
बिहार सरकार की व्यवस्था में सोशल मीडिया चैनल और हैंडल को फॉलोअर या सब्सक्राइबर संख्या के आधार पर चार कैटेगरी में रखा गया है।
| कैटेगरी | फॉलोअर/सब्सक्राइबर |
|---|---|
| A कैटेगरी | 10 लाख से अधिक |
| B कैटेगरी | 5 लाख से 10 लाख |
| C कैटेगरी | 2 लाख से 5 लाख |
| D कैटेगरी | 1 लाख से 2 लाख |
इन कैटेगरी में सूचीबद्ध होने के लिए पिछले छह महीनों में हर महीने मूल वीडियो या पोस्ट की न्यूनतम संख्या जैसी शर्तें भी लागू हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस हिस्से में बदलाव नहीं किया गया है।
90 सेकंड तक के वीडियो पर कितनी अतिरिक्त कमाई?
नए प्रावधानों के अनुसार 90 सेकंड तक के वीडियो, रील या पॉडकास्ट में 30 दिन बाद आने वाले अतिरिक्त व्यूज के आधार पर अतिरिक्त भुगतान का प्रावधान है।
10 हजार रुपये अतिरिक्त भुगतान के लिए निर्धारित अतिरिक्त व्यूज कैटेगरी के अनुसार इस प्रकार बताए गए हैं:
- A कैटेगरी: 1 लाख अतिरिक्त व्यूज
- B कैटेगरी: 40 हजार अतिरिक्त व्यूज
- C कैटेगरी: 20 हजार अतिरिक्त व्यूज
- D कैटेगरी: 10 हजार अतिरिक्त व्यूज
इससे छोटे फॉलोअर बेस वाले सूचीबद्ध क्रिएटर्स के लिए अतिरिक्त भुगतान की सीमा पहले की तुलना में कम हो सकती है।
90 सेकंड से ज्यादा के वीडियो में भी बदलाव
90 सेकंड से अधिक लंबे वीडियो में भी अतिरिक्त व्यूज के आधार पर भुगतान की व्यवस्था को कैटेगरी के हिसाब से रखा गया है। A, B, C और D कैटेगरी के लिए अतिरिक्त व्यूज की सीमा अलग-अलग निर्धारित की गई है।
इसका उद्देश्य बड़े और छोटे सोशल मीडिया चैनलों के बीच व्यूज की वास्तविक क्षमता को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त भुगतान की व्यवस्था करना बताया जा रहा है।
सरकारी विज्ञापन के लिए कितने रुपये मिल सकते हैं?
बिहार सरकार की सोशल मीडिया विज्ञापन व्यवस्था में विज्ञापन की अवधि और सोशल मीडिया हैंडल की कैटेगरी के आधार पर अलग-अलग दरें निर्धारित हैं।
उपलब्ध विवरण के अनुसार 90 सेकंड तक के विज्ञापन को केवल पोस्ट करने के लिए अलग-अलग कैटेगरी में लगभग 20 हजार से 50 हजार रुपये तक की दर बताई गई है। वहीं, विज्ञापन का वीडियो बनाने और पोस्ट करने की स्थिति में यह राशि लगभग 50 हजार से 80 हजार रुपये तक हो सकती है।
इसी तरह 90 सेकंड से अधिक के विज्ञापन के लिए केवल पोस्ट करने पर लगभग 50 हजार से 80 हजार रुपये और वीडियो तैयार करने के साथ लगभग 60 हजार से 1 लाख रुपये तक की दर बताई गई है।
अंतिम भुगतान संबंधित सरकारी नियम, कैटेगरी, स्वीकृत विज्ञापन और कार्य की प्रकृति के आधार पर निर्धारित होगा।
YouTube के साथ Facebook, Instagram और X को भी फायदा
नियम केवल YouTube तक सीमित नहीं हैं। इनके दायरे में Facebook, Instagram और X जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय सूचीबद्ध हैंडल और चैनल भी आते हैं।
वीडियो, रील और पॉडकास्ट जैसे डिजिटल कंटेंट के माध्यम से सरकारी प्रचार करने वाले क्रिएटर्स के लिए भी यह व्यवस्था महत्वपूर्ण हो सकती है।
हर छह महीने में होगी फॉलोअर संख्या की समीक्षा
नियमों में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान सोशल मीडिया हैंडल की फॉलोअर या सब्सक्राइबर संख्या की समीक्षा से जुड़ा है।
सरकार हर छह महीने में सूचीबद्ध सोशल मीडिया हैंडल और चैनलों के फॉलोअर/सब्सक्राइबर की संख्या की समीक्षा करेगी। यदि किसी चैनल या हैंडल के फॉलोअर कम हो जाते हैं, तो आगे मिलने वाले सरकारी विज्ञापन का रेट नई कैटेगरी के अनुसार तय किया जा सकता है।
गैर-सूचीबद्ध Influencers के लिए भी रास्ता?
नए प्रावधानों में यह व्यवस्था भी बताई गई है कि जरूरत और अवसर को देखते हुए सरकार ऐसे Influencer, हैंडल या चैनल को भी विज्ञापन दे सकती है जो सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में सूचीबद्ध नहीं हैं।
हालांकि, इसका इस्तेमाल संबंधित सरकारी विभाग की आवश्यकता और लागू नियमों के अनुसार ही किया जाएगा। इसलिए इसे सभी गैर-सूचीबद्ध YouTubers के लिए नियमित सरकारी विज्ञापन की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।
2024 के नियमों के बाद अब क्या बदला?
बिहार सरकार ने इससे पहले 2024 में सोशल मीडिया विज्ञापन से संबंधित नियमों में बदलाव किया था। अब अतिरिक्त व्यूज के आधार पर भुगतान की व्यवस्था में कैटेगरी के अनुसार अंतर किया गया है।
इस बदलाव के पीछे मुख्य विचार यह है कि 10 लाख से अधिक फॉलोअर वाले बड़े चैनल और करीब 1 लाख फॉलोअर वाले छोटे चैनल के व्यूज की क्षमता एक जैसी नहीं होती। इसी को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त भुगतान के लिए आवश्यक व्यूज को अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया है।
छोटे क्रिएटर्स के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
Digital Content Creation में बड़ी चुनौती छोटे चैनलों के लिए लंबे समय तक पर्याप्त व्यूज हासिल करना होती है। ऐसे में यदि सरकारी विज्ञापन से जुड़े अतिरिक्त भुगतान के लिए जरूरी व्यूज कम होते हैं, तो पात्र और सूचीबद्ध छोटे क्रिएटर्स के लिए कमाई का अवसर बढ़ सकता है।
हालांकि, सरकारी विज्ञापन पाने के लिए केवल फॉलोअर या व्यूज पर्याप्त नहीं हैं। संबंधित सूचीबद्धता, कंटेंट और विभागीय नियमों का पालन करना भी जरूरी होगा।
निष्कर्ष
बिहार सरकार के सोशल मीडिया विज्ञापन नियमों में किया गया यह बदलाव छोटे और मध्यम डिजिटल क्रिएटर्स के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। खासकर अतिरिक्त व्यूज पर मिलने वाले भुगतान की शर्तों को कैटेगरी के अनुसार बदलने से छोटे सूचीबद्ध चैनलों को राहत मिलने की संभावना है।
अब नजर इस बात पर होगी कि नए नियम लागू होने के बाद बिहार के YouTubers, Instagram Creators, Facebook Pages और अन्य Digital Influencers को सरकारी विज्ञापन के माध्यम से कितने नए अवसर मिलते हैं।
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