- Highlights
- पासपोर्ट को लेकर हुई नई टिप्पणी के बाद नागरिकता पर बहस तेज हो गई है।
- भारतीय नागरिकता का निर्धारण Citizen Act 1955 और संविधान के प्रावधानों से होता है।
- जन्म, वंश, पंजीकरण, प्राकृतिककरण और भारत में विलय नागरिकता के पांच प्रमुख आधार हैं।
- केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि कई सरकारी रिकॉर्ड नागरिकता साबित करने में मदद करते हैं।
- जानिए भारतीय नागरिकता से जुड़े नियम और जरूरी दस्तावेजों की पूरी जानकारी।
Citizen Act 1955: नई दिल्ली। हाल ही में पासपोर्ट और नागरिकता को लेकर हुई एक टिप्पणी के बाद देशभर में यह सवाल चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर भारतीय नागरिकता का निर्धारण किस आधार पर होता है और कौन-कौन से दस्तावेज किसी व्यक्ति की नागरिकता साबित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पासपोर्ट विदेश यात्रा के लिए एक आधिकारिक दस्तावेज है, लेकिन भारतीय नागरिकता का निर्धारण केवल इसी के आधार पर नहीं किया जाता।
संविधान और नागरिकता कानून में क्या है प्रावधान?
भारतीय संविधान के भाग-2 में नागरिकता से जुड़े मूल प्रावधान दिए गए हैं। संविधान लागू होने के समय यानी 26 जनवरी 1950 को नागरिकता के लिए विशेष नियम निर्धारित किए गए थे। बाद में संसद ने अनुच्छेद-11 के तहत नागरिकता से संबंधित विस्तृत कानून बनाने का अधिकार इस्तेमाल करते हुए नागरिकता अधिनियम, 1955 (Citizenship Act 1955) लागू किया।
आज भारत में नागरिकता से जुड़े अधिकांश मामलों का निपटारा इसी कानून के तहत किया जाता है।
भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के पांच प्रमुख आधार
नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के पांच प्रमुख तरीके हैं।
- जन्म के आधार पर नागरिकता
26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच भारत में जन्म लेने वाला व्यक्ति सामान्यतः भारतीय नागरिक माना जाता है।
1 जुलाई 1987 के बाद जन्म लेने वालों के लिए यह आवश्यक है कि माता-पिता में से कम से कम एक भारतीय नागरिक हो।
3 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे व्यक्ति के लिए अतिरिक्त शर्त लागू है कि एक माता-पिता भारतीय नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो। - वंश (Descent) के आधार पर नागरिकता
यदि किसी व्यक्ति का जन्म विदेश में हुआ है, लेकिन उसके माता या पिता भारतीय नागरिक हैं, तो वह निर्धारित शर्तों के तहत भारतीय नागरिकता का दावा कर सकता है।
- पंजीकरण (Registration) के आधार पर
भारतीय मूल के व्यक्ति, भारतीय नागरिक से विवाह करने वाले कुछ विदेशी नागरिक तथा अधिनियम में निर्दिष्ट अन्य श्रेणियों के लोग पंजीकरण के माध्यम से नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं।
- प्राकृतिककरण (Naturalization)
यह प्रक्रिया उन विदेशी नागरिकों के लिए होती है जो भारत में निर्धारित अवधि तक निवास करने सहित अन्य कानूनी शर्तों को पूरा करते हैं और भारतीय नागरिकता प्राप्त करना चाहते हैं।
- भारत में किसी क्षेत्र के विलय के आधार पर
जब कोई नया क्षेत्र भारत का हिस्सा बनता है, तब वहां के निवासियों की नागरिकता से संबंधित विशेष प्रावधान लागू किए जाते हैं।
भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज अहम हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए कोई एक सार्वभौमिक दस्तावेज निर्धारित नहीं है। हालांकि, कई दस्तावेज नागरिकता संबंधी दावों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इनमें शामिल हैं:
जन्म प्रमाणपत्र
भारतीय पासपोर्ट
नागरिकता प्रमाणपत्र
सरकारी अभिलेख
स्कूल प्रवेश रिकॉर्ड
सरकारी सेवा रिकॉर्ड
अन्य वैध सरकारी दस्तावेज
विवाद की स्थिति में कौन करता है फैसला?
नागरिकता से जुड़े मामलों का प्रशासनिक अधिकार गृह मंत्रालय के पास होता है। यदि किसी व्यक्ति की नागरिकता को लेकर विवाद या दावा सामने आता है, तो संबंधित अधिकारी उपलब्ध दस्तावेजों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर निर्णय लेते हैं।
निष्कर्ष
भारतीय नागरिकता एक संवैधानिक और कानूनी विषय है, जिसका निर्धारण केवल किसी एक दस्तावेज के आधार पर नहीं किया जाता। नागरिकता अधिनियम, 1955 नागरिकता प्राप्त करने और उसके निर्धारण के स्पष्ट प्रावधान देता है। ऐसे में नागरिकता से जुड़े किसी भी दावे या विवाद की स्थिति में विभिन्न आधिकारिक दस्तावेज और कानूनी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
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