Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने आज वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट पेश किया।
Budget 2026: इस केंद्रीय बजट 2026 में, सरकार ने एक तरफ मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपोर्ट और ग्रीन एनर्जी को राहत दी है, वहीं दूसरी तरफ स्टॉक मार्केट और कुछ अन्य गतिविधियों से जुड़े इन्वेस्टमेंट को महंगा कर दिया है।
सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी हटा दी है, जिससे ये दवाएं भारतीय बाजार में सस्ती हो जाएंगी।
इसके अलावा, सरकार ने 7 दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए विदेश से आयात की जाने वाली दवाओं पर भी ड्यूटी हटा दी है।
इतना ही नहीं, सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों, सोलर पैनल और ग्रीन एनर्जी प्रोडक्शन से जुड़े कुछ उपकरणों पर भी ड्यूटी कम कर दी है।
इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं, मरीजों, निवेशकों और उद्योगों पर पड़ेगा।
हालांकि, बजट में कोई टैक्स छूट नहीं दी गई और न ही टैक्स के बारे में कोई बड़ी घोषणा की गई।
सरकार ने दावा किया है कि यह बजट 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
यह देखते हुए कि भारत अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ और मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता का सामना कर रहा है, यह बजट कड़ी निगरानी में था।
इलाज और दवाएं सस्ती होंगी
इस बजट के माध्यम से केंद्र सरकार ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों और उनके परिवारों पर इलाज के खर्च का बोझ कम करने की कोशिश की है।
बजट में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 जीवन रक्षक दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी पूरी तरह से खत्म कर दी गई है।
इसके अलावा, 7 दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली आयातित दवाएं और विशेष भोजन भी टैक्स-फ्री होंगे।
घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट को राहत
माइक्रोवेव ओवन के कुछ जरूरी पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी कम कर दी गई है। सी-फूड एक्सपोर्ट के लिए ड्यूटी-फ्री इनपुट की सीमा 1% से बढ़ाकर 3% कर दी गई है। लेदर, सिंथेटिक फुटवियर और टेक्सटाइल एक्सपोर्ट के लिए भी ड्यूटी-फ्री इनपुट और डेडलाइन बढ़ा दी गई है।
इससे इनके सस्ते होने की संभावना है।
न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए आयात किए जाने वाले उपकरणों को 2035 तक कस्टम ड्यूटी से छूट मिलेगी।
इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर और ग्रीन एनर्जी सस्ती होने की संभावना है
सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों, सोलर पैनल और ग्रीन एनर्जी प्रोडक्शन पर भी टैक्स कम करने की कोशिश की है।
लिथियम-आयन बैटरी स्टोरेज सिस्टम से जुड़े कई इनपुट को कस्टम ड्यूटी से छूट दी गई है। सोलर पैनल के लिए सोलर ग्लास बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल सोडियम एंटीमोनेट पर भी ड्यूटी हटा दी गई है।
इससे इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर एनर्जी और बैटरी सेक्टर में प्रोडक्शन कॉस्ट कम हो सकती है।
हालांकि, यह फायदा ग्राहकों तक पहुंचेगा या नहीं, यह कंपनियों की पॉलिसी पर निर्भर करेगा।
हालांकि इन बदलावों से प्रोडक्शन कॉस्ट कम होगी, लेकिन ग्राहक की कीमत कम होगी या नहीं, यह कंपनियां तय करेंगी।
पर्सनल इंपोर्ट और विदेशी खर्च पर राहत
पर्सनल इस्तेमाल के लिए विदेश से इम्पोर्ट किए गए सामान पर कस्टम ड्यूटी 20% से घटाकर 10% कर दी गई है।
इसका मतलब है कि विदेश से इम्पोर्ट किए गए इलेक्ट्रॉनिक्स या गिफ्ट आइटम अब सस्ते हो सकते हैं।
विदेशी टूर पैकेज पर सोर्स पर टैक्स कलेक्शन (TCS) को 5% या 20% से घटाकर बिना किसी लिमिट के सीधा 2% कर दिया गया है।
इसी तरह, शिक्षा और मेडिकल इलाज के लिए विदेश भेजे गए पैसे पर TCS अब 10 लाख रुपये से ज़्यादा की रकम पर 5% के बजाय 2% होगा।
इससे पर्यटन या शिक्षा के लिए विदेश यात्रा करने वाले भारतीयों को कुछ राहत मिल सकती है।
क्या महंगा हुआ है
शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग थोड़ी महंगी हो जाएगी।
सरकार ने फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया है। ऑप्शंस प्रीमियम पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) 0.1% से बढ़ाकर 0.15% और ऑप्शन एक्सरसाइज पर 0.125% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है। इससे फ्यूचर्स और ऑप्शंस सेगमेंट में ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी।
कंपनी शेयर बायबैक पर प्रमोटरों के लिए टैक्स स्ट्रक्चर को सख्त कर दिया गया है।
प्रमोटरों को अब कैपिटल गेन्स टैक्स के साथ एक अतिरिक्त टैक्स देना होगा, जिससे बायबैक के ज़रिए प्रॉफ़िट कमाना कम आकर्षक हो सकता है।
कुछ केमिकल्स, जैसे पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड, और कुछ कंज्यूमर गुड्स पर पहले से मिल रही कस्टम ड्यूटी छूट हटा दी गई है।
इन पर अब 7.5% तक की बेसिक कस्टम ड्यूटी लगेगी, जिससे इनकी लैंडिंग कॉस्ट बढ़ जाएगी।
केमिकल्स की बढ़ी हुई कीमत से उनसे बने प्रोडक्ट्स की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
संक्षेप में, बजट 2026 ने मिनरल्स, स्क्रैप और शराब को महंगा कर दिया है।
इस बीच, चमड़ा, टेक्सटाइल, सिंथेटिक फुटवियर, विदेश यात्रा, 17 कैंसर की दवाएं, माइक्रोवेव ओवन, एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपोनेंट्स, EV बैटरी और डायबिटीज की दवाएं सस्ती होने की उम्मीद है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण के विश्लेषण से साफ पता चलता है कि इस बार सरकार ने प्रोडक्शन और कंजम्पशन को सस्ता करने और फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन को महंगा करने का फैसला किया है।
बजट के बाद जो प्रोडक्ट्स/एक्टिविटीज़ महंगी होंगी, उनमें शेयर बाज़ार में फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग शामिल है, क्योंकि सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स बढ़ा दिया गया है। इसी तरह, शराब, स्क्रैप, मिनरल्स और तेंदू के पत्तों की बिक्री पर सोर्स पर बढ़े हुए टैक्स कलेक्शन से इन सेक्टर्स में लागत बढ़ सकती है।
बजट के बाद, मेडिकल खर्च कम होने की उम्मीद है, विदेश यात्रा और शिक्षा पर टैक्स कम होगा, और कई रोज़मर्रा के इलेक्ट्रॉनिक और एनर्जी से जुड़े प्रोडक्ट्स सस्ते होने की संभावना है।
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