Private Schools: आरा: भोजपुर जिला प्रशासन ने फीस की मनमानी वसूली और निजी स्कूलों (Private Schools) द्वारा यूनिफॉर्म व किताबें (uniforms and books) केवल एक ही तय दुकान से खरीदने की थोपी गई अनिवार्यता को लेकर मिली शिकायतों के जवाब में कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी (District Magistrate) के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए, सभी निजी स्कूलों को आदेश दिया गया है कि वे 15 अप्रैल, 2026 तक फीस, किताबों और यूनिफॉर्म से संबंधित पूरी जानकारी सार्वजनिक करें।
निजी स्कूलों के लिए प्रशासन का आदेश: इसके अलावा, एक चेतावनी भी जारी की गई है जिसमें कहा गया है कि इन नियमों का उल्लंघन करते पाए जाने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी—जिसमें उनकी मान्यता रद्द करना भी शामिल हो सकता है। भोजपुर कलेक्ट्रेट द्वारा जारी इस आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि शिक्षा को एक व्यावसायिक धंधे के रूप में चलाने की प्रवृत्ति एक अत्यंत गंभीर और आपत्तिजनक प्रथा है, जिस पर तत्काल रोक लगाना आवश्यक है।
15 अप्रैल से पहले जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य: जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुसार, अब सभी निजी स्कूल संचालकों के लिए यह अनिवार्य है कि वे प्रत्येक कक्षा के लिए अनिवार्य किताबों की सूची, साथ ही यूनिफॉर्म से संबंधित विवरण, 15 अप्रैल, 2026 से पहले स्कूल की वेबसाइट पर या स्कूल परिसर के भीतर किसी सार्वजनिक सूचना पट्ट पर प्रकाशित करें, ताकि अभिभावकों तक यह जानकारी आसानी से पहुँच सके।
यूनिफॉर्म में कोई अनावश्यक बदलाव नहीं: आदेश में यह भी कहा गया है कि स्कूल प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना होगा कि स्कूल यूनिफॉर्म में कोई अनावश्यक बदलाव न किया जाए, जिससे अभिभावकों और छात्रों पर बेवजह का आर्थिक बोझ न पड़े। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार, अपनी पसंद की किसी भी दुकान से यूनिफॉर्म, किताबें और अन्य सामग्री खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं। इन वस्तुओं को केवल स्कूल से या किसी विशेष तय दुकान से खरीदने की अनिवार्यता थोपना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
जिला प्रशासन ने संबंधित प्रखंड शिक्षा अधिकारियों (Block Education Officers) को नोडल अधिकारी नियुक्त किया है और उन्हें निर्देश दिया है कि वे सभी निजी स्कूलों में फीस, यूनिफॉर्म, किताबों और अन्य सामग्रियों की व्यवस्था के संबंध में निरीक्षण करें। इन निरीक्षणों के दौरान, स्कूल का नाम, U-DISE कोड, नामांकित छात्रों की संख्या, शुल्क संरचना, मान्यता की स्थिति और अभिभावकों से प्राप्त किसी भी शिकायत से संबंधित डेटा एकत्र किया जाएगा। दोषी स्कूलों की मान्यता रद्द की जाएगी: यदि कोई स्कूल अवैध शुल्क वसूलने या आर्थिक शोषण में लिप्त पाया जाता है, तो संबंधित स्कूल को तत्काल वे अनाधिकृत शुल्क वापस करने होंगे। इसके अलावा, स्कूल को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा, और यदि आवश्यक समझा गया, तो उसकी मान्यता को निलंबित या रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इसके अतिरिक्त, बिहार निजी स्कूल (शुल्क विनियमन) विधेयक, 2019 के तहत, स्कूल के प्रधानाचार्य, प्रशासक और निदेशक मंडल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने कहा है कि इस आदेश के अनुपालन की निगरानी अनुमंडल और जिला, दोनों स्तरों पर की जाएगी। निरीक्षणों के दौरान प्राप्त शिकायतों और पाई गई अनियमितताओं से संबंधित रिपोर्ट नियमित आधार पर प्रस्तुत की जाएंगी।
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